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महाकाल के आंगन में कल से शिव नवरात्रि महोत्सव का उल्लास
उज्जैन:भगवान शंकर के विवाह को महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शिवरात्रि के पूर्व से मंदिर में मंगल गीत, चंदन व हल्दी की रस्म और विशेष शृंगार के आयोजन होते हैं। कल से महाकाल के आंगन में शिव नवरात्रि महोत्सव की धूम प्रारंभ होगी और 5 मार्च तक विभिन्न कार्यक्रमों के बीच भगवान के विशेष शृंगार होंगे।
शिव नवरात्रि महोत्सव अंतर्गत प्रथम दिन नैवेद्य कक्ष में चंद्रमौलेश्वर पूजन, कोटितीर्थ स्थित कोटेश्वर महादेव पूजन के पश्चात गर्भगृह में 11 ब्राह्मणों व शासकीय पुजारी द्वारा एकदश एकादशमी रूद्राभिषेक प्रारंभ होगा। प्रात: 10.30 बजे होने वाली आरती पंचामृत अभिषेक पूजन के पश्चात होगी। सायंकाल पूजन अभिषेक के बाद प्रथम दिवस वस्त्र धारण कराएंगे जिसमें भगवान को सोला, मेखला, दुपट्टा धारण कराया जाएगा। यह क्रम प्रतिदिन शिवरात्रि तक रहेगा।
इन रूपों में होंगे भगवान के दर्शन
महाकाल भगवान का क्रमानुसार शेषनाग, घटाटोप, छबिना, मनमहेश, तांडव, होल्कर, उमामहेश आदि स्वरूपों में शृंगार होगा और भक्तों को प्रतिदिन अलग-अलग दर्शन होंगे।
भगवान का चंदन से उबटन
भगवान महाकाल का चंदन से उबटन होगा और जलाधारी पर हल्दी चढ़ाई जावेगी। पुजारी पं. आशीष शर्मा ने चर्चा में बताया कि भगवान महाकालेश्वर को चंदन, केसर अर्पित होता है जबकि जलाधारी पर हल्दी चढ़ाई जाती है।
मंगल गीतों पर झुमेंगे भक्त
शिवरात्रि के दिन भगवान महाकालेश्वर को दुल्हा स्वरूप में सजाकर सेहरा शृंगार किया जाता है। मंदिर प्रांगण में महिलाएं विवाह के मंगल गीत गाती हैं और भक्त नृत्य कर आनंद मनाएंगे। 5 फरवरी को भक्तों को सेहरा दर्शन होंगे।
भस्मार्ती प्रभारी को हटाया
दो दिनों पूर्व भस्मार्ती दर्शन के लिये पहुंचे कांग्रेस नेताओं की भस्मार्ती प्रभारी अनुराग चौबे से कहासुनी हुई थी। इसकी शिकायत प्रभारी मंत्री और कलेक्टर तक पहुंची। बताया जाता है कि विवाद के बाद भस्मार्ती प्रभारी को यहां से हटाकर अन्य दायित्व सौंपा गया है।
मार्गदर्शकों की जरूरत
भगवान महाकालेश्वर के दर्शनों के लिये देश भर से हर उम्र वर्ग के श्रद्धालु पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन व्यवस्था की जानकारी नहीं होती। इनमें अधिक कठिनाई दिव्यांगजनों, महिलाओं और वृद्धों को होती है। पर्वों पर मंदिर की दर्शन व्यवस्था में प्रबंध समिति द्वारा बदलाव भी किये जाते हैं ऐसे में श्रद्धालुओं को मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है ताकि सही रास्ते से भगवान के दर्शन कर पाएंगे।
अलग से कर्मचारी लगाएंगे
दिव्यांगजन और वृद्धों को विशेष दर्शन व्यवस्था और उनके मार्गदर्शन के लिये अलग से कर्मचारी तैनात किये जाएंगे ताकि उन्हें कतार में लगने या असुविधा का सामाना न करना पड़े।